एक दशक से आर्थिक आधार पर आरक्षण के विचार को आगे बढ़ाने का प्रयास
52 वर्षीय प्रवीण अरोड़ा का जन्म कैराना, उत्तर प्रदेश में हुआ। वर्तमान में वे शालीमार बाग, दिल्ली में निवास करते हैं। उन्होंने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है।
प्रवीण अरोड़ा पिछले एक दशक से भारत में आर्थिक आधार पर आरक्षण की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं। उनका प्रयास इस विषय को व्यापक राष्ट्रीय संवाद का हिस्सा बनाना तथा विभिन्न सामाजिक वर्गों, समुदायों और राजनीतिक विचारधाराओं के बीच शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक संवाद स्थापित करना रहा है।
आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए निरंतर प्रयास
प्रवीण अरोड़ा लंबे समय से इस विचार को सामने रखते रहे हैं कि आरक्षण एवं अवसर से संबंधित नीतियों पर आर्थिक परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण आधार के रूप में विचार किया जाना चाहिए।
उनका सार्वजनिक प्रयास इस विषय पर लोगों को जागरूक करने, विभिन्न विचारों को एक मंच पर लाने और आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लोकतांत्रिक माध्यमों से आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहा है। उनके अनुसार, इस विषय पर व्यापक चर्चा और सर्वसम्मति के माध्यम से आगे बढ़ना आवश्यक है।
“देश के सभी नागरिकों को एक सूत्र में जोड़ते हुए समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था के लिए संवाद आवश्यक है।”
सभी वर्गों को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास
प्रवीण अरोड़ा का कहना है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण का विषय किसी एक जाति, धर्म या वर्ग के विरुद्ध नहीं है।
वे SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग सहित समाज के सभी वर्गों को एक साथ जोड़कर समान अवसर और सामाजिक समरसता के विषय पर संवाद स्थापित करने का प्रयास करते रहे हैं।
उनका उद्देश्य विभिन्न वर्गों के बीच मतभेद बढ़ाना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से एक ऐसा दृष्टिकोण सामने रखना है जिसमें देश के सभी नागरिकों के हितों पर चर्चा हो सके।
किसी धर्म या राजनीतिक दल के विरोध में नहीं
प्रवीण अरोड़ा के अनुसार, उन्होंने राष्ट्र के किसी प्रमुख राजनीतिक दल, धर्म या जाति का विरोध करने की नीति नहीं अपनाई है।
उनका कहना है कि वे उन सभी संगठनों, राजनीतिक दलों और स्वतंत्र उम्मीदवारों का समर्थन करते रहे हैं जो भारत में आर्थिक आधार पर आरक्षण की विचारधारा को समर्थन देते हैं।
उनका प्रयास राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर आर्थिक आधार पर आरक्षण के विचार को सार्वजनिक चर्चा में बनाए रखना रहा है।
2019 और 2024
2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के संदर्भ में प्रवीण अरोड़ा के अनुसार, उन्होंने उन राजनीतिक दलों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया जो आर्थिक आधार पर आरक्षण की विचारधारा के पक्षधर थे।
जिन लोकसभा क्षेत्रों में इस विचारधारा का समर्थन करने वाला कोई उम्मीदवार उपलब्ध नहीं था, वहां उनके द्वारा NOTA के विकल्प को प्रमुखता देने की बात कही गई है।
संघर्ष और चुनौतियां
आर्थिक आधार पर आरक्षण की विचारधारा को आगे बढ़ाने के दौरान प्रवीण अरोड़ा के अनुसार, उन्हें दो बार हमलों का सामना भी करना पड़ा है।
इन चुनौतियों के बावजूद वे इस विषय पर अपने सार्वजनिक प्रयासों को जारी रखने की बात कहते हैं। उनके अनुसार, उन्होंने हमेशा अपनी बात को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जनता के सामने रखने का प्रयास किया है।
शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन
प्रवीण अरोड़ा के सार्वजनिक प्रयासों का एक प्रमुख पक्ष शांतिपूर्ण तरीके से अपनी विचारधारा को सामने रखना है।
उनका मानना है कि किसी भी बड़े सामाजिक एवं नीतिगत विषय पर संवाद, विचार-विमर्श और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ना आवश्यक है।

